पाकिस्तान को FATF से बड़ा झटका, न सुधरा तो इकॉनमी ब्लैकलिस्ट

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आतंक पर ऐक्शन के लिए एफएटीएफ (फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स) ने पाकिस्तान को आखिरी चेतावनी दी है। फ्लॉरिडा में में हुए एफएटीएफ बैठक में पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए अक्टूबर 2019 तक की डेडलाइन तय की गई है। एफएटीएफ की तरफ से इस्लामाबाद के लिए जारी की गई चेतावनी ने पाक को ब्लैकलिस्ट किए जाने की आशंका को बहुत मजबूत कर दिया है। पाकिस्तान के प्रमुख समाचारपत्र डॉन में तुर्की की समाचार एजेंसी के हवाले से प्रकाशित खबर के अनुसार, तुर्की ही एक मात्र देश था जिसने इस्लामाबाद को ब्लैकलिस्ट किए जाने का विरोध किया।
भारत के द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को अमेरिका और ब्रिटेन ने भी अपना समर्थन दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पाक के साथ लंबे समय से खड़े रहनेवाले चीन ने इस मीटिंग से दूरी ही बरती। भारत एफएटीएफ की एशिया-पैसेफिक जॉइंट ग्रुप का को-चेयर सदस्य है। एफएटीएफ के निर्देशों के अनुसार पाकिस्तान की आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए उठाए कदमों की समीक्षा भारत भी करता है।

पाक के करीबी मित्र चीन ने बैठक से बनाई दूरी

भारत के द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को अमेरिका और ब्रिटेन ने भी अपना समर्थन दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पाक के साथ लंबे समय से खड़े रहनेवाले चीन ने इस मीटिंग से दूरी ही बरती। भारत एफएटीएफ की एशिया-पैसेफिक जॉइंट ग्रुप का को-चेयर सदस्य है। एफएटीएफ के निर्देशों के अनुसार पाकिस्तान की आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए उठाए कदमों की समीक्षा भारत भी करता है।

पाकिस्तान पर FATF की सख्ती की कहानी है पुरानी

पाकिस्तान पिछले एक साल से FATF की ग्रे लिस्ट में है और उसने पिछले साल जून में ऐंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग मेकेनिज्म को मजबूत बनाने के लिए उसके साथ काम करने का वादा किया था। पिछले साल पाक को ग्रे लिस्ट में डालने के फैसले के साथ एफएटीएफ ने बयान जारी कर कहा था कि पाकिस्तान पूरी तरह से आतंक का आर्थिक समर्थन रोकने में नाकाम रहा है। इस आधार पर इसे हाई रिस्क की श्रेणी में रखा जाता है।

‘आतंक के खिलाफ इस्लामाबाद की कार्रवाई नाकाफी’

22 फरवरी 2019 को इसकी समापन रिपोर्ट में कहा गया, ‘टेररिज्म फाइनैंसिंग (आतंक का वित्त पोषण) रोकने में पाकिस्तान ने पर्याप्त समझ का प्रदर्शन नहीं किया। दा-एश (ISIS का अरेबिक नाम), जेयूडी, एफआईएफ, लश्कर-ए-तैयबा, जेईएम और तालिबान से जुड़े आतंकी संगठनों के आर्थिक आधार को कमजोर करने के लिए पाकिस्तान ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए।’ एफएटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा, ‘जनवरी 2019 तक पाकिस्तान की ओर से आतंक के खिलाफ उठाए कदम पर्याप्त नहीं कहे जा सकते। इस सीमित प्रयास को देखते हुए एफएटीएफ पाक को निर्देश देता है कि आतंक के खिलाफ पाक तत्काल और कठोर कदम उठाए। खास तौर 2019 मई तक की समय सीमा के अंदर।’

FATF की कार्रवाई का असर, पाक रह जाएगा अकेला

एफएटीएफ की ओर से जारी की गई यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी है। अगर एफएटीएफ इस्लामाबाद को ब्लैकलिस्ट करता है तो इसका सीधा असर होगा कि वैश्विक दुनिया में पाक पूरी तरह से अलग-थलग हो जाएगा। इसका असर पाक को आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से मिलनेवाली सहायता पर भी पड़ सकता है।

पाकिस्तान के सामने अब क्या विकल्प है?

तुर्की की ओर से मिली मदद के बाद इतना स्पष्ट है कि कुछ देशों से पाकिस्तान को मदद मिलती रहेगी। हालांकि, इसके बावजूद भी पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में ही रहेगा। पिछले सप्ताह हुई रिव्यू में स्पष्ट किया गया है कि एफएटीएफ की ओर से जारी किए गए 27 में से सिर्फ 25 पॉइंट को पूरा करने में पाक नाकाम रहा। सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पाकिस्तान को अगर ब्लैकलिस्ट किया जाता है तो यह पाक की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत हानिकारक होगा। इसका असर यह भी होगा कि पहले से ही बुरी तरह से कर्ज में डूबे पाक को दूसरे देशों से कठोर शर्तों पर ऋण लेना होगा।

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