तीन तलाक बिल पर विपक्ष का हंगामा, शशि थरूर ने रखी ये शर्त

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे की शुरूआत हो चुकी है। जिसके बाद मोदी के इस कार्यकाल के बीच पहला संसद का भी शुभारंभ हो चुका है। पीएम मोदी इस कार्यकाल में सबसे पहले तमाम सासंदो में संसद में गोपनियता की शपथ ली। जिसके बाद अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का भी अभिभाषण लोकसभा में गुरुवार को हुआ। जिसके बाद पूरी तरह से शुक्रवार को संसद की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। लोकसभा में शुक्रवार को पीएम मोदी के सबसे बड़े वादे को नियम बनाने की पहल की गई। लोकसभा में कानून मंत्री रविशंकर ने तीन तलाक बिल को रखा। इस पर विपक्ष ने जमकर हंगामा मचाया। इस दौरान विपक्षी पार्टियों ने तीन तलाक बिल को सदन के पटल पर रखे जाने का विरोध किया। इस दौरान सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस की तरफ से संसद में इस बिल का जमकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जो बिल लाया जा रहा है, वह संविधान के खिलाफ है। शशि थरूर ने सदन में कहा कि मैं इस बिल के पेश किए जाने का विरोध करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं तीन तलाक का समर्थन नहीं करता हूं लेकिन इस बिल के विरोध में हूं। थरूर बोले कि ये बिल संविधान के खिलाफ है, इसमें सिविल और क्रिमिनल कानून को मिला दिया गया है।

इसके आगे शशि थरूर ने लोकसभा में कहा कि अगर सरकार की नजर में तलाक देकर पत्नी को छोड़ देना गुनाह है, तो ये सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक ही सीमित क्यों है। उन्होंने कहा कि क्यों ना इस कानून को सभी समुदाय के लिए लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सरकार इस बिल के जरिए मुस्लिम महिलाओं को फायदा नहीं पहुंचा रही है बल्कि सिर्फ मुस्लिम पुरुषों को ही सजा दी रही है। इतना ही नहीं, थरूर ने इस मौके पर तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की दलील भी रखी। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ही तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित कर दिया है, तो सरकार सजा किस बात की दे रही है। उन्होंने कहा कि इस बिल का किसी भी तरह गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। जिसमें मुस्लिम पुरुषों को तलाक देने पर तीन साल की सजा की बात कही है, लेकिन इन तीन साल में महिलाओं और बच्चों का ध्यान कौन रखेगा। हालांकि इस दौरान कांग्रेस की तरफ से संसद में मांग भी रखी गई। कांग्रेस ने कहा कि बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए और इस पर सही तरीके से चर्चा हो। सभी तरह की राय पर विचार किया जाए।

गौरतलब है कि तीन तलाक बिल को कानून को रूप में पास करवाने के लिए मोदी सरकार कड़ी मेहनत कर रही है। अपने पहले कार्यकाल में भी पीएम मोदी ने तीन तलाक बिल को लोकसभा में पेश किया था। इस दौरान ये बिल पास भी हो गया था। लेकिन राज्यसभा में एनडीए बहुमत से कम सीटों होने की वजह से ये बिल वहां अटक गया। इसी दौरान पीएम मोदी का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही पुराना बिल रद्द हो गया और अब बिल को दोबारा पेश किया जा रहा है।

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