बिहार में पप्पू यादव की बढ़ी लोकप्रियता, नीतीश कुमार लोगों की दुसरी पसंद

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हाल ही में हुई सर्वे में बिहार में जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष एवम पुर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को नम्बर वन लीडर बताया है. दरअसल इस साल लाचार बिहार में पुरे तरीके से लीची बदनाम भी हुई और नेताओं पर सत्ता का गुरुर भी छाया रहा. बदजुबानी इन नेताओं के सर चढ़ कर बोल रही थी. केंद्र सहित बिहार सरकार भी बेबस और असहाय बनी रही और दम तोड़ दिए सैकड़ों निर्दोष मासूम. बिहार में आजकल बिमारियों का खतरनाक दौर चल रहा है और इन बिमारियों से होंने वाले मौतों का सिलसिला भी थमता नजर नहीं आ रहा है. बिहार के सरकार एवम सरकारी अस्पतालों की बात की जाएं तो व्यवस्थाएं यंहा की सरकारी सिस्टम को मुंह चिढ़ाती नजर आती है. हद की सभी सीमाएं उस समय पार होती हैं जब अस्पतालों के अंदर रखें कुछ देखनें में खूबसूरत एवम आकर्षक यांत्रिक उपकरण तो नजर आते हैं लेकिन उसे चलाने वाले परिंदे ही नहीं होते. कारण साफ है की, बिहार सरकार द्वारा नये कर्मचारियों का नियुक्ति नहीं हो पाना.

          पिछले दिनों बिहार के कई हिस्सों में चमकी बुखार से सैकड़ों बच्चों की मौत हो गयी थी. लू से भी सैकड़ों  आम  आदमी  को अपनी जानें  गवानी पड़ी. यंहा तक की कई जिलों में धारा 144 भी लगाना पड़ा. पुरा बिहार सहित देश के लोग सदमे में थे. बिहार के तत्कालीन  मुख्यमंत्री  नीतिश  कुमार  एवम  उनके मंत्री  द्वारा  भी  इस  मुद्दे पर  सवाल  करने  वाले मीडियाकर्मियों को संतोषजनक जबाब नहीं दे पा रहे थे. सबसे ज्यादा कष्टदायक बात तब होती जब एक तरफ लगातार बच्चों की मौतें होती रही और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडे क्रिकेट स्कोर की बातें करते फिर रहे थे. बिहार के इतिहास के पन्नों में इन्सानियत का एक अध्याय तब जुड़ गया जब इस दौर में भी पिछले लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष एवम पुर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लाचार एवम बेबस केंद्रिय एवम बिहार सरकार को आईना दिखा कर दर्जनों डॉक्टरों का शिष्टमंडल एवम दवाओं से लदी गाड़ियों को तैयार कर इन खतरनाक बीमारियों से लड़ने के लिए पीडित इलाकों में अपना डेरा जमा दिया. पप्पू यादव ने मानवता के नाते ही अपनी पुरी टीम के साथ उन्हीं पीडित इलाकों में खुले छत के नीचे रात भी गुजारना शुरू किये.

पीड़ितो के प्रति पप्पू यादव ने ये कोई पहला काम नहीं किया है बल्कि अपने संसदीय काल में केंद्रीय सरकार द्वारा मिला फ्लैट भी मरीजों एवम असहायों को समर्पित कर दिया था. बिहार के मुजफ्फरपुर में पीड़ित परिवारों के प्रति पप्पू यादव की इस निष्ठा को पुरा बिहार के लोग भी देख आशावान नजरों से भलीभांति देखी रहे थे क्योंकि विपक्ष भी इस मामलें में कछुए की चाल चलता नजर आ रहा था. वैसे बीमारियों का मौसम तो अब शुरू हो ही गया है लेकिन ये कोई नई बात नहीं है. फिर भी सरकारें कुंभकर्ण की नींद सोती रहती हैं. अब सवाल ये है की जनता आखिर कब तक ऐसे ही सरकारों की लाचार एवम बेबस सिस्टम पर अपना दम तोड़ती रहेगी. सरकारों एवम उनके मंत्रियों की कब नींदें खुलेगी और वो क्रिकेटमय दुनिया से बाहर अपनी जिम्मेवारियों का सही से निर्वहन करेंगे.

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